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रेशम बनाने के लिए ई-रेशम पोर्टल पर पंजीयन कराएं किसान
रेशम उत्पादक किसान को रेशम बेचने के लिए पहले से जिले में पंजीयन केंद्र पर पंजीयन करना पड़ता था | जिससे किसानों का अधिक समय के साथ खर्च भी आता था | सरकार के पास भी सही डेटा नहीं उपलब्ध होता था | मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को रेशम बेचने के लिए आनलाईन पंजीयन की व्यवस्था की है |
रेशम बेचने के लिए पंजीयन कब से होगा ?
पंजीयन की प्रक्रिया शुरू कर दिया है , यह प्रक्रिया 15 जून तक चलेगी | इसके लिए राज्य सरकार ने 1 से 15 जून तक सभी जिला रेशम अधिकारी को प्रतिदिन दो गाँव का दौरा कर कृषकों को ई रेशम पोर्टल पर पंजीयन कराने की जानकारी के साथ प्रोत्साहित करेगा |
 किसान पंजीयन कैसे कराएँ
किसान ई – रेशम पोर्टल पर जाकर सामान्य जानकारी भरकर एक हितग्राही आईडी प्राप्त करें | यह आईडी सदा के लिए उनके पास रहेगा | आईडी प्राप्त करने पर किसान उस आईडी से पंजीयन के लिए फार्म भरे | 
 पंजीयन के लिए दिशा निर्देश इस तरह है
सामन्य जानकारी प्रविष्ट कर हितग्राही आईडी एवं सत्यापन कोड प्राप्त करें |
अपनी हितग्राही आईडी एवं सत्यापन कोड प्रविष्ट क्र शेष जानकारी अपडेट करें |
अपने बैंक खाते का विवरण प्रविष्ट करें |
अपनी भूमि से संबन्धित जानकारी प्रविष्ट करें |
फर्म मशीनरी की जानकारी प्रविष्ट करें
उक्त समस्त जानकारी प्रविष्ट कर आवेदन को लाक करें |
इस बात का विशेष ध्यान रखें की पंजीयन आधार कार्ड से ही होगा |


  1. खरपतवार भोजन एवं प्रकाश के लिए मुख्य फसल से प्रतिस्पर्धा करते हैं अत: फसल के लिए खेत में डाले गए उर्वरक व जल की पूर्ण मात्र फसल के काम नहीं आती है।
  2. खरपतवार कीट एवं रोग कारक जीवाणुओं को शरण, भोजन तथा स्थान प्रदान करते हैं अर्थात् इन सभी फसल के शत्रुओं के लिए परपोषी होते हैं, अत: परोक्ष रूप से फसल उत्पादन को सीमित करते हैं।
  3. खरपतवार नियंत्रण के लिए मशीन एवं मजदूर आदि की व्यवस्था व उपयोग से उत्पादन लागत में वृद्धि होती है, जिससे खेती में लाभांश घटता है।
  4. खरपतवार कटाई में बाधा डालते हैं तथा कटाई और गहाई व्यय को बढ़ाते हैं। मुख्य फसल उपज में खरपतवारों के बीज होने से उत्पादित बीज एवं उपज की गुणवत्ता घट जाती है, जिससे किसान को अपेक्षाकृत कम आय मिलती है।
  5. जलीय-खरपतवार सिंचाई व्यवस्था को अवरूद्ध करते हैं, जिससे सिंचाई उपभोग क्षमता घटती है एवं उत्पादन व्यय बढ़ता है।

खरपतवारों की रोकथाम से न केवल फसलों की पैदावार बढ़ाई जा सकती है, बल्कि उसमें निहित प्रोटीन व अन्य लाभकारी तत्व एवं फसलों की गुणवत्ता में वृद्धि की जा सकती है। प्राय: निंदाई करके इन्हें निकाल दिया जाता है। फसलों की निंदाई के लिए प्रयुक्त होने वाले कुछ यांत्रिक उपकरणों का विवरण दिया गया है-
ड्राईलैंड पेग वीडर
ड्राईलैंड वीडर (हुक टाईप) एक ऐसा हस्तचालित यंत्र है जो फसल की पंक्तियों के बीच खरपतवार को नष्ट करता है। इसमें एक रोलर होता है जिसमें लोहे की रॉड द्वारा फिट की गई दो डिस्क लगी होती है। रॉड पर छोटे समचतुर्भुज आकार के हुक कंपित (स्टेगर्ड) प्रकार से जुडे होते हंै। पूरी रोलर असेम्बली नरम लोहे से निर्मित होती है। रोलर असेम्बली के पीछे हैंडल के रॉड (भुजाएँ) पर ‘वी’आकारीय ब्लेड लगे होते है। कार्य की गहराई के अनुसार ब्लेड की ऊंचाई व्यवस्थित की जा सकती है। मशीन की भुजाएँ हैंडल के साथ जुड़ी होती है, जो पतले मजबूत पाईप से बनी होती है। हैंडल की ऊंचाई भी चालक की आवश्यकतानुसार व्यवस्थित की जा सकती है। इस यंत्र को खरपतवार हटाने के लिए फसलों की पंक्तियों मे खड़ी हुई स्थिति में बार-बार धकेलने एवं खींचने की प्रक्रिया द्वारा चालित किया जाता है। समचतुर्भुजी आकारी हुक मिट्टी में गड़ाकर घुुमाव प्रक्रिया द्वारा मिट्टी को बारीक करते है। दबाने की स्थिति मे ब्लेड जमीन में घुसकर खरपतवार की जड़ों को काट देते हैं। इसका प्रयोग सब्जी, फलों के बागों मे तथा अंगूर उद्यानों मे खरपतवार हटाने के लिए किया जाता है। यह भूमि की सख्त मिट्टी की परत को तोड़कर उसे उपजाऊ बनाने में भी सहायक है। इसकी कार्य क्षमता लगभग 0.05 हेक्टेयर प्रतिदिन होती है।
व्हील हैंड हो
‘व्हील हैंड हो’ एक व्यापक रूप में स्वीकार किया गया खरपतवार नियंत्रण का यंत्र है जो फसल की पंक्तियों के मध्य खरपतवार नियंत्रण हेतु उपयोग किया जाता है। यह एक लंबे हैंडल का यंत्र है जो आगे-पीछे धकेलने एवं खींचने की प्रक्रिया द्वारा चालित होता है। पहियों की संख्या एक या दो हो सकती है और पहियों का व्यास इसके डिजाईन के अनुसार होता है। इस यंत्र के फ्रेम में विभिन्न प्रकार की मिट्टी मे कार्य करने वाले पुर्जे जैसे: सीधे ब्लेड, प्रतिवर्ती ब्लेड, स्वीप, भी-ब्लेड, टाईन कल्टीवेटर, आयामी कुदाल, लघु आकारीय फरोअर, स्पाईक हैरो (रेक) आदि लगाने हेतु प्रावधान होता है। यह यंत्र अकेले व्यक्ति द्वारा चालित होता है। इस औजार के सभी मिट्टी में कार्य करने वाले पुर्जे मध्यम कार्बन स्टील के बने होते हैं जो 40-45 एच.आर.सी. तक कठोर किए होते है। मशीन के संचालन एवं कार्य की गहराई के लिए हैंडल की ऊंचाई को व्यवस्थित किया जाता है और व्हील को बार बार धकेलने एवं खींचने की प्रक्रिया द्वारा चालित किया जाता है जिससे मिट्टी में कार्य करने वाले पुर्जे फसलों की पंक्तियों की जमीन में धँसकर खरपतवार को कांटते या जड़ से उखाड़ते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा घास भी कटकर मिट्टी में दब जाती है। इसका प्रयोग पंक्तियुक्त सब्जी फसलों में तथा अन्य फसलों में निराई एवं खरपतवार हटाने के लिए किया जाता है।
खरपतवार ऐसे पौधों एवं वनस्पतियों को कहा जाता है जो बिना चाहे खेत में फसल के साथ उगते हैं तथा जो मुख्य फसल के संदर्भ में अवांछित होते हैं। शायद दूसरे स्थान पर इनका खाद्य एवं दवा के रूप में कुछ जगह पर महत्व हो, परन्तु ऐसे पौधे फसल के बीच में होने से उपज पर प्रतिकूल प्रभाव और अन्य कृषि क्रियाओं में बाधा डालते हैं। खरपतवार बिना चाहे बहुप्रजानिक, प्रतिस्पर्धी, कभी-कभी जहरीले तथा पारिस्थितिकी के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं। यह खेत में सामान्य भूपरिष्करण के बाद फसल के साथ ही उगते रहते हैं। ऐसे कुछ पौधे उसी फसल के पूर्वज भी हो सकते हैं, जैसे-मध्य भारत में ओराइजा निवारा नामक जंगली प्रजाति के पौधे। खरपतवार द्वारा फसलों के विकास एवं वृद्धि में बाधा होती है, परिणाम स्वरूप उपज में गिरावट आती है। अन्तर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के अनुमान से खरपतवार नियंत्रण न होने से यह गिरावट खेती की विभिन्न दशाओं में 44 से 66 प्रतिशत तक आंकी गई है। खरपतवार निम्न प्रकार से फसलों के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं।
कोनो वीडर
इस यंत्र में दो रोटर, फ्लोट, फ्रेम और हैंडल लगे होते है। रोटर त्रिशंकु आकार के होते हैं एवं इसकी सतह पर लंबाई मे चौरस दाँतेदार स्ट्रिप्स जुड़ी होती है। रोटर विपरीत अनुकूलनिय आगे-पीछे क्रम में लगे होते है। फ्लोट, रोटर और हैंडल फ्रेम के साथ जुड़े होते हैं। फ्लोट कार्य की गहराई को नियंत्रित करते हंै तथा रोटर असेंबली को पोखर मिट्टी में धसने नहीं देते। कोनो वीडर दबाव प्रक्रिया से चालित किया जाता है। रोटर के अभिविन्यास मिट्टी के शीर्ष 3 से.मी. मे आगे पीछे संचालन करते है जिससे खरपतवार को जड़ से उखाडऩे मे मदद मिलती है। कोनो वीडर का प्रयोग पंक्तियुक्त धान की फसल में कुशलतापूर्वक खरपतवार हटाने के लिए किया जाता है। यह आसानी से चलाया जा सकता है तथा यह पोखर मिट्टी मे नहीं धँसता। इस यंत्र की कार्य क्षमता लगभग 0.18 हेक्टेयर प्रतिदिन है।
स्वचालित रोटरी पावर वीडर
वीडर एक डीजल इंजन चालित यंत्र है। इंजन की पावर वी बेल्टदृपुली के द्वारा ग्राउंड व्हील को प्रेषित की जाती है। गहराई बनाए रखने के लिए इस यंत्र में पीछे एक पहिया लगाया गया है। रोटरी वीडींग अटेचमेंट द्वारा खरपतवार नष्ट करने की प्रक्रिया की जाती है। रोटरी वीडर की विभिन्न पंक्तियों में प्रत्येक डिस्क पर एक-दूसरे की विपरीत दिशा में घुमावदार ब्लेड लगे होते हैं। इन ब्लेड के घूमने से मिट्टी एवं घास आदि कटकर मिश्रित हो जाते हैं। रोटरी टिलर की 400 मि.मी. चौड़ाई में कार्य करने की क्षमता होती है तथा फसल क्षेत्र में मिट्टी एवं घास आदि को काटकर मिश्रित करने अथवा खरपतवार नष्ट करने हेतु गहराई आवश्यकतानुसार निर्धारित की जा सकती है। इस यंत्र का प्रयोग गन्ना, मक्का, कपास, टमाटर, बैंगन और दलहन जैसी फसलें जिनमें पंक्तियों की बीच की दूरी 450 मि.मी. से ज्यादा है, में खरपतवार नियंत्रण हेतु किया जाता है। स्वीप ब्लेड, रिजर एवं ट्रॉली जैसे अटेचमेंट भी इस यंत्र के साथ लगाए जा सकते है। कार्य क्षमता 0.1-0.12 हे. प्रति घंटा  है एवं इसकी कीमत रु. 60000 से रु. 80000 के बीच है।
पावर टिलर स्वीप टाईन कल्टीवेटर
यह यंत्र विशेषत: 5-8 हॉर्स पावर (4.5 से 6.0 किलो वॉट) के पावर टिलर से चलाने के लिए तैयार किया गया है तथा मुख्यत: खड़ी फसल जैसे सोयाबीन, ज्वार, मक्का काला चना, मटर इत्यादि जहाँ पंक्ति का अंतर चौड़ा होता है तथा पावर टिलर पौधों को बिना नुकसान पहुंचाये चलाया जा सकता है। खरपतवार नियंत्रण बहुत आसानी से किया जा सकता है। इसमे पीछे की तरफ एक गहराई नियंत्रक पहिया लगा होता है जो कार्य की एक समान गहराई को बनाए रखता है। यह मध्यम तथा हल्की मिट्टी के लिए उपयोगी है। हीच सिस्टम सहित मेन फ्रेम, हैंडल, ड्राइव व्हील तथा टाईन इत्यादि इसके मुख्य घटक है। इस यन्त्र की संचालन गति 1.8-2.5 कि./घण्टा, ईंधन खपत 0.7-1.0 ली./घण्टा तथा क्षेत्र क्षमता 0.18 – 0.25 हेकटेयर प्रति घंटा है।
कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार, किसानों के लाभार्थ विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का कार्यान्वयन अपने संस्थानों/ संगठनों और राज्य सरकारों के माध्यम से करता है। इसमें प्रकाशित की गई विभिन्न स्कीमों से संबंधित निर्देशों, परिपत्रों और अनुदेशों से इन स्कीमों के अंतर्गत प्रोत्साहित विभिन्न घटकों के लाभों के प्रकार और उनकी सीमा के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध होती है।
     कृषक जगत द्वारा शृंखलाबद्ध रूप से किसानों को जानकारी दी जाएगी और क्षेत्र विस्तार कर्मियों, गैर सरकारी संगठनों एवं कृषि विकास कार्य में लगे हुए तथा नीति निर्माताओं के लिए एक रेडी रेकनर के रूप में उपयोगी होगी। इसमें विभिन्न स्कीमों/ कार्यक्रमों से संबंधित सूचना कृषि क्षेत्र के लोग उचित समय पर प्राप्त कर पाएंगे।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड, भूमि संरक्षण एवं सूक्ष्म पोषक तत्व
क्या करें ?
  • मिट्टी की जांच के आधार पर हमेशा उचित मात्रा में उर्वरक का उपयोग करें।
  • मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बरकरार रखने के लिए जैविक खाद का उपयोग करें।
  • उर्वरकों का पूर्ण लाभ पाने हेतु उर्वरक को छिड़कने की बजाय जड़ों के पास डालें।
  • फास्फेटिक उर्वरकों का विवेकपूर्ण और प्रभावी प्रयोग सुनिश्चित करें ताकि जड़ों/ तनों का समुचित विकास हो तथा फसल समय पर पके, विशेष रूप से फलीदार फसलें, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए वायुमंडलीय नाइट्रोजन का उपयोग करती है।
  • सहभागी जैविक गारन्टी व्यवस्था (पी.जी.एस. इंडिया) प्रमाणीकरण अपनाने के इच्छुक किसान अपने आस-पास के गांव में कम से कम पांच किसानों का एक समूह बनाकर इसका पंजीकरण निकटतम जैविक खेती के क्षेत्रीय केन्द्र में करायें।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड : मृदा स्वास्थ्य कार्ड, 19 फरवरी 2015 को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत शुरू हुई। मृदा स्वास्थ्य कार्ड सभी जोत धारकों को हर दो वर्ष के अंतराल के बाद दिये जाएंगे ताकि वे फसल पैदावार लेने के लिए सिफारिश किए गए पोषक तत्व डालें ताकि मृदा स्वास्थ्य में सुधार हो और भूमि की ऊपजाऊ शक्ति भी बढ़े।
किसानों को गेहूं खरीदी का भुगतान 
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि रबी उपार्जन 2019 के तहत प्रदेश के किसानों को साढ़े 11 हजार करोड़ की राशि का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रिकॉर्ड 73 लाख 60
हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की गई। श्री तोमर ने रबी उपार्जन की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को बैंकों में लंबित राशि शीघ्रता से किसानों के खाते में जमा कराने के निर्देश दिये हैं।
 2,000 करोड़ से अधिक राशि का भुगतान बकाया 
 खाद्य मंत्री श्री तोमर ने कहा कि किसानों को फसल विक्रय की राशि तुरंत भुगतान के प्रयास तेजी से किया जाना चाहिए। इस वर्ष रबी फसलों के उपार्जन के विशेष प्रबंध किए गए थे। राज्य सरकार द्वारा खरीदी केंद्रों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ, इलेक्ट्रॉनिक तौल काँटों से खरीदी करने, खरीदी की पूर्व सूचना किसानों को देने और फसल राशि किसानों के खाते में ऑनलाइन अंतरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इस वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 9 लाख 65 हजार किसानों से 73 लाख 60 हजार मीट्रिक टन खरीदी की गई, जो एक रिकॉर्ड है। इसके एवज में कुल 13 हजार 43 करोड़ की राशि का भुगतान किसानों को किया जाना है। खरीदी की अंतिम तिथि 25 मई थी।